क्यूं बदल गए लोकतंत्र,राजनीति के मायने

नई दिल्ली। भाजपा की भगवा राजनीति चरम पर है। पीएम नरेन्द्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अजेय जोडी हर हाल में समूचे भारत में कमल खिलाना चाहते हैं, ले देकर चार पांच राज्य ही ऐसे हैं जहां भाजपा की दखल नहीं है। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडू को छोड दें तो ऐसा कोई बडा राज्य नहीं बचा जहां भाजपा नहीं है। कश्मीर से केरल तक संघ व भाजपा की तूती बोलती है। इसे अमित शाह का कमाल कहें या पीएम मोदी का करिश्माई चेहरा जिसका हर अंदाल लोगों को भा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष्र राहुल गांधी ने अपनी पार्टी को पुनगर्ठित कर रहे हैं लेकिन अब वैसे छत्रप कहां से लाएंगे जो नेहरु,इंदिरा, नरसिम्हा या राजीव गांधी के जमाने में थे।

राजस्थान भाजपा में खींचतान से कांग्रेस खूब खुश है, सीएम वसुंधरा राजे खुद भाजपा आलाकमान से नाराज है और राजस्थान की जनता राजे से। वैसे राजस्थान की चुनावी गणित समझने के लिए दिमाग पर बल देने की जरुरत नहीं है, राजस्थान की जनता कब अर्श पर बिठा दे और कब फर्श पर उतार दे इसका अंदाजा हर किसी को है। बकौल बीते 20 साल कांग्रेस – भाजपा ने 10-10 साल राज किया है। गहलोत व वसुंधरा को बराबर का समय मिला पर विकास व भ्रष्टाचार के मामले में किसने क्या क्या किया सब जनता की बही खाते में दर्ज है। तीसरा मोर्चा भी हनहना रहा है पर दुल्हे व बाराती दोनों केवल नाश्ता पाणी के समय ही नजर आते हैं, जनहित पर बोलने को कोई आगे नहीं आता। क्या अब सडकों पर आंदोलन की राजनीति पूरी हो गई या जो आंदोलन की राजनीति कर रहे हैं वे राजनीतिक केमिस्ट्री का सफल प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं, चूंकि राजनीतिक दलों के अलावा कई नाम बी डी अग्रवाल, लोकेन्द्रसिंह कालवी, कर्नल बैंसला, डां सुधांशु शर्मा, पंचशील जैन, पूनम अंकुर छाबडा, मीठा लाल, के सी बोकाडिया ऐसे नाम हैं जो एक मंच पर आ गए तो राष्ट्रीय दलों को अपनी पहचान रखने की जद्रदोजहद करनी पडेगी। शायद भाजपा नेत्रत्व भी इसीलिए राजस्थान में प्रयोग करने की जोखिम नहीं उठा पा रहा है।

निस्संदेह कांग्रेस 2019 को लेकर काफी आशान्वित व उत्साहित है लेकिन 18 महीने में क्या नतीजे व हालात इतने बदल जाएंगे कि देश के अस्सी फीसदी भूभाग पर काबिज भाजपा को दिलली से यूं बातों से ही निकाल कर कांग्रेस सत्ता पर कब्जा जमा लेगी। ठीक है राहुल की नीति व नीयत ठीक है लेकिन राजद प्रमुख लालू यादव, एनसीपी प्रमुख शरद पंवार, डीएमके प्रमुख करुणानिधी से गलबहियां कहीं महंगी ना पड जाए। देश की जनता अब सपा, बसपा व ऐसे भ्रष्ट नेताओं को सत्ता में देखना शायद ही पसंद करे। कांग्रेस नेता के सलाहकारों को लेकर गत दिनों एक वरिष्ठ पत्रकार की टिप्पणी बडी रोचक थी वहीं राजनीतिक शास्त्र के ग्याता योगेनद्र यादव ने ऐसी ही खिंचाई पीएमओ के सलाहकार व सोशल मीडिया चलाने वालों की कर दी है।
मीडिया
दरअसल अब सीरियस पत्रकारिता व राजनीति का जमाना नहीं रह गया अलबत्ता नेता जरुर धीर गंभीर होना चाहिए। देश की जनता अब कहने के राष्ट्रीय चैनल व जनहितेशी अखबार के झूठ और काल्पनिक खबरों को पचाना सीख गया है, कांग्रेस हो या भाजपा सत्ता के लिए कैसे दांव आजमा रहे हैं, कैसे नेताओं पर दांव लगा रहे हैं जैसे 125 करोड की आबादी में ईमानदार व साफ छवि के लोग ही नहीं मिल रहे हैं। अब राजनीति ऐसा व्यापार बन गया जहां बिना कोई धन लगाए करोडों का वारा न्यारा करने का मौका खुद ब खुद झोली में आ गिरता है। मीडिया मालिक भी अब विज्ञापन व राजनीतिक पदों के लिए सत्ता व नेताओं की चरण वंदना में लग गए हैं, ऐसा नही है ये अब ही हो रहा है पर अब सब कुछ खुलेआम हो रहा है।
राजनीति
कैसे कैसे माफिया पनप गए हैं देश में, पहले शराब माफिया जमीन माफिया होते थे आजकल पानी माफिया, बजरी माफिया, खनन माफिया, केबल माफिया, मीडिया माफिया, एड माफिया, पॉलिटिकल माफिया, बैंक माफिया, लोन माफिया, सहकारी माफिया, एजुकेशन माफिया, हेल्थ माफिया बाकी सूची आप जोड लें कहने का मतलब यह है कि किसी भी तरह धन बल व बाहूबल कमाकर लोग फिर राजनीति की गद्दी जमाने की फिराक में लगते हैं, और पैसे लेकर टिकट बांटने वाली राजनीति भी इनहें हाथों हाथ लेती है।
क्यूं राज्यसभा बुजूर्ग लोगों का व्रद्वाश्रम बन कर रह गया या राजनीतिक अहसान उतारने का जरिया बन गया, देश का नाम दुनिया में रोशन करने वाले रतन टाटा, नारायण मूर्ति, राहुल बजाज, कैलाश सत्याथी, इला भट्ट, अन्ना हजारे जैसे लोग राज्यसभा में क्यूं नहीं भेजे जाते। आज का युवा जाति, धर्म व बुकार बातों से उकता कर सही में साफ सुथरी राजनीति का पक्षधर है। हाल ही भाजपा ने युवा नेता बिप्लव देब को सीएम बनाया लेकिन उनके बयान पढकर मेरे जैसे कईयों को निराशा हुई, क्या उन्हें ऐश्वर्या राय, डायना हैडन के जिस्म की नुमाइश करने के लिए यह पद दिया गया था, अच्छा होता वे युवाओं के साथ तकनीक की बात करते बजाए विदुर के इंटरनेट के।
न्याय जगत
एट्रोसिटी एक्ट को लेकर सीजेआई के खिलाफ महाभियोग लाने वाले माकपाई नेताओं के साथ कांग्रेस का लगना अधिकांश लोगों को रास नहीं आया, महाअदालत ने किसी कानून पर पुनर्विचार को कह दिया तो कौनसा आसमान टूट गया। गिरफ्तारी लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति के लिए कलंक है, एट्रोसिटी का केस लगते ही सीधे जेल में डालकर जमानत ना देना क्या प्राक्रतिक नयाय का विरोधी नहीं है, फिर कैसे सामान्य लोगों का इस सिस्टम में विश्वास बना रहेगा। हालांकि केनद्र सामाजिक न्याय मंत्री रामदास अठावले मोदी व राहुल दोनों को दलित विरोधी नहीं मानते लेकिन नियम कायदों के अमल का अनुभव नेताओं को अधिक है या जजों को, क्या लोकतंत्र में माननीय मुख्य न्यायाधीश को इतना भर कहने का हक नहीं, क्यों किसी कानून को लागू करने से पहले सरकारें अब जनता की राय नहीं लेकर तुरत फुरत में लागू कर देती है। क्या राजनीति का मतलब अब सबसे बडे वर्ग को खुश रहना भर रह गया या देश के लिए जो उचित हो ऐसे काम करना सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। – शत्रुभैया

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“पुलिस एक ही व्यक्ति का शव लेकर दोबारा पहुंची”

वडोदरा पुलिस ने नर्मदा कैनाल से एक ऐसे व्यक्ति का शव बरामद किया जिसका म्रत शरीर गत दिनों उसके परिवार को सौंप चुके थे, परिजनों ने उसका एक मई को अंतिम संस्कार भी कर दिया लेकिन उसी व्यक्ति का शव दूसरी बार परिवार वालों को सौंपने पहुंची तो परिवार अब पूछ रहे हैं के पहले जिसका अंतिम संस्कार किया वह शव किसका था।
गत दिनों पुलिस को नर्मदा केनाल से एक शव मिला जिसकी शिनाख्त 45 वर्षीय व्यवसायी सूरज शाह के रूप में करके पुलिस ने शव उनके परिजनों को सौंप दिया। शाह की हत्या उसके वकील विजय रावजी रोहित व उसके दो साथियों ने मिलकर कर दी थी। रावजी ने सूरज से साढे चार लाख रु उधार लिए थे जिन्हें चुका नहीं पाने की स्थिति में उसने हत्या कर दी थी। सूरत की हत्या 25 अप्रेल को करके उन्होंने नर्मदा कैनाल में डाल दिया था। पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया जिसका उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया। गत दिनों पुलिस ने हालोल के पास नर्मदा कैनाल से एक ओर शव बरामद किया जिसका हुलिया व कपडे सूरज शाह से मिलते जुलते होने पर पुलिस फिर शव  उसके परिजनों को सौंपने के लिए बुलाया। पुलिस हाल इस रहस्य का पर्दा नहीं उठा पा रही है कि दूसरा शव सूरज का है तो पहला शव जिसका अंतिम संस्कार हो चुका है वह किसका था। सूरज की पत्नी श्रुति शाह ने कहा कि पुलिस ने जिस शव का हमसे अंतिम संस्कार कराया उसकी पहचात तो पता करे।

पानी नहीं आसानी से मिल जाती है बीयर

शिक्षामंत्री ने दी पानी बचाने की नसीहत
केन्द्रीय मंत्री ने माना चल रहा है सट्टा कारोबार
अहमदाबाद। गुजरात के शिक्षामंत्री भूपेंद्रसिंह चूडास्मा ने जहां सरकारी समारोहों में पानी की छोटी बोतल रखने की सलाह दी वहीं दक्षिण गुजरात के विधायक आर सी पटेल  ने कहा कि यहां पानी भले आसानी से नहीं मिले लेकिन बीयर आसानी से मिल जाती है। उधर केन्द्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी ने सट्टा लगने की बात कहकर सबको चौंका दिया।
गुजरात में पूर्ण शराबबंदी है तथा सरकार नशांबंदी कानून का सख्ती से अमल कराने का दावा कर रही है लेकिन विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक आर सी पटेल ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि पानी मुश्किल से मिलता है लेकिन बीयर आसानी से मिल जाती है। नवसारी के बोरसी माछीवाड में जलसंचय अभियान के समारोह में पटेल ने कहा कि लोग ही बताते हैं कि पैसे हों तो यहां बीयर आसानी से मिल जाती है। जबकि वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र सिंह चूडास्मा ने पानी बचाने की नसीहत देते हुए अधिकारियों से कहा कि सरकारी समारोहों में पानी की छोटी बोतल रखनी चाहिए, चूंकि बडी बोतल का अधिकांश पानी व्यर्थ जाता है, मेहमान भी समारोह के दौरान पूरा पानी नहीं पी पाते हैं।
केन्द्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी ने भी अटपटा बयान देते हुए कहा कि हमारे यहां भाभर में खूब सटटा चलता है,चौधरी ने कहा चुनाव के दौरान उन पर भी सट्टा लगा था। उनका दावा है कि देश में कई लोग इस कारोबार से जुडे हुए हैं

एसपी ने खुलवा रखे हैं 36 बैंक खाते

सूरत के बिल्डर से करोडों के बीटकोइन लूटने के मामले में गिरफ्तार अमरेली के पुलिस अधीक्षक जगदीश पटेल करोडों के आसामी हैं। सीआईडी ने उनके विविध ठिकानों से लाखों की नकदी व करोरों की जमीन के दस्तावेज जुटाए हैं। एसपी ने 36 बैंक खाते खुलवा रखे हैं जिनमें भारी मात्रा में नकदी जमा है। 7 आरोपी पुलिस कांस्टेबल इस मामले में फरार है, इन्हीं सबकी पुछताछ के लिए सीआईडी ने एसपी को 5 दिन के और रिमांड पर लिया है।
सीआईडी क्राइम ने गत माह 12 करोड रुपएे मूल्य के बीटकोइन लूट मामले में पुलिस अधीक्षक जगदीश पटेल को गिरफ्तार किया था, सीआईडी ने एसीबी कोर्ट को एक बंद लिफाफे में अब तक की जांच रिपोर्ट सोँपते हुए बताया कि इस समूचे प्रकरण में जगदीश पटेल ही मुख्य साजिशकर्ता हैं। आरोपी 13 साल से वर्ग 1 के अधिकारी हैं तथा कानून की बारीकियां समझते हैं इसलिए वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। नौ दिन के रिमांड पूरे होने के बाद सीआईडी ने पटेल को और 5 दिन केरिमांड पर लिया है। उनसे फरार 7 अन्य आरोपी कांस्टेबलों की जानकारी लेनी है साथ ही द्वारका व अन्य प्रमुख शहरों में करोडों की जमीन के दस्तावेज व विविध बैंकों में पटेल के 36 खातों में जमा नकदी की भी जांच करनी है। पुलिस अभी यह तय नहीं कर पा रही है कि इन खातों में कब कब कितनी रकम जमा हुई और उसकी आय के स्रोत क्या हैं इसलिए बैंक खातों व उनके कॉल डिटेल की भी जांच होगी। गौरतलब है कि पुलिस निरीक्षक अनंत पटेल जो खुद इस मामले में आरोपी हैं तथा पुलिस गिरफ्त में हैं ने फरवरी में सूरत से एक करोड 33 लाख रु आने की बात अपने बयान में कही थी, साथ ही इस मामले में बटोरे गए लाखों रु लेकर पुलिस कांस्टेबल मुंबई कहां और क्यूं गए थे इसकी जानकारी भी सीआईडी को जुटानी है।

सूरत में कठुआ जैसा जघन्य अपराध उजागर

#नौ साल की मासूम से दूष्कर्म व हत्या #  बंधक बनाकर किया दूष्कर्म

कठुआ जम्मू कश्मीर की तरह गुजरात के सूरत में भी नौ साल की एक मासूम को आठ दिन तक बंधक बनाकर उसके साथ दूष्कर्म करने के बाद गला दबाकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान बताने वाले को 20 हजार रु के इनाम की घोषणा की है साथ ही शहर में 12 सौ पोस्टल लगाए हैं। इस घटना से स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है, सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा व राजकोट आदि शहरों में लोग रोष जता रहे व कैंडल मार्च कर रहे हैं।
सूरत के पुलिस आयुक्त सतीश शर्मा ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि आठ दिन पहले शहर के पांडेसरा में िमली एक नौ वर्ष की मासूम लडकी, उसके माता – पिता तथा अपराधियों की पहचान बताने वाले को 20 हजार रु का इनाम दिया जाएगा। पीडिता गुजरात से बाहर की होनेकी संभावना है, पुलिस का मानना है कि अपराधियों ने सूरत से बाहर कहीं लडकी को करीब एक सप्ताह बंधक बनाकर रखा तथा उसके साथ दूष्कर्म व शारीरिक रूप से प्रताडित किया। पीडिता के म्रत शरीर पर 86 घाव पाए गए हैं। प्रबल संभावना है कि पीडिता भी गुजरात से बाहर की हो।
पुलिस आयुक्त शर्मा ने बताया कि लडकी की हत्या गला दबाकर की गई है, हत्या से पहले उसके साथ कई दिन तक दूष्कर्म किया गया। मेडिकल रिपोर्ट में म्रतक पीडीता के जननांग वाले भाग में जख्म के भी निशान मिले हैं। आयुक्त शर्मा ने कहा कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा जल्द से जल्द पुलिस इन अपराधियों तक पहुंच जाऐगी। पुलिस ने पीडिता, उसके माता-पिता तथा अपराधियों के संबंध में जानकारी देने वाले को इनाम की घोषणा के साथ बताया है कि जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। पुलिस निरीक्षक के बी झाला मामले की जांच कर रहे हैं, पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 323 व 376 2 आईजेएम तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। इस जघन्य अपराध को लेकर गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा व राजकोट आदि शहरों में लोगों ने नाराजगी जताई है व अहमदाबाद में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की अगुआई में एक कैंडल मार्च का भी आयोजन किया गया।

दलितों से करीबी बढाने में जुटी भाजपा 

#डॉ अंबेडकर जयंती मनेगी धूमधाम से
#विधायक मेवाणी करेंगे भाजपा का विरोध
##दलितों को कानूनी सुरक्षा के लिए बने एट्रोसिटी एक्ट पर उच्चतम न्यायालय के सुझाव के बाद भारत बंद के साथ ही गुजरात में भाजपा दलितों से करीबी बढाने का प्रयास कर रही है वहीं निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भाजपा को डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से दूर रखने का ऐलान कर पार्टी की मुसीबत बढा दी है।
उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की खंडपीठ की ओर से एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी पर रोक के सुझाव के खिलाफ मेवाणी दलित समुदाय को एकजुट करने में लगे हुए हैं। हालांकि केन्द्र सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार करने की अर्जी लगा दी है लेकिन गुजरात में भाजपा को दलित समाज की नाराजगी का आभास हो गया जिसके चलते आगामी 14 अप्रेल को डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती को सरकार व संगठन ने जिला, तहसील व मंडल स्तर पर जोर शोर से लोकतंत्र के उत्सव के रूप में मनाने का ऐलान किया है। उधर निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने एट्रोसिटी एक्ट मामले में सारा दोष भाजपानीत केन्द्र सरकार पर मंढते हुए कहा है कि वे भाजपा नेताओं को डॉ अंबेडकर की प्रतिमा को छूने भी नहीं देंगे, इस दिन दलित समाज के युवा मानव श्रंखला बनाकर अंबेडकर प्रतिमा को घेरकर रखेंगे तथा भाजपा नेताओं कोउनसे दूर रखेंगे।
विधायक मेवाणी उत्तर गुजरात के वडगाम क्षेत्र से कांग्रेस के समर्थन से विधायक चुने गए हैं तथा ऊना में दलित युवकों की पिटाई की घटना के बाद से ही वे चर्चा में आए हैं। ऊना में म्रत गाय का चमडा उतार रहे दलित युवकों को कुछ युवकों ने कार से बांधकर बुरी तरह पीटा था, उससे पहले पुलिस की गोली से उत्तर गुजरात के थानगढ में तीन दलित युवकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद अब उच्चतम न्यायालय के सुझाव से भाजपा खेमे में बैचेनी है, गौरतलब है कि गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है और प्रदेश भाजपा संगठन आगामी चुनाव में इसी सफलता को दोहराना चाहता है ताकि कांग्रेस गुजरात से एक भी सीट नहीं जीत सके लेकिन दलित व मुस्लिम गठजोड भाजपा के इस गणित को बिगाड सकता है इसलिए भाजपा डॉ अंबेडकर की जयंती पर दलितों से करीबी बढाने का प्रयास कर रही है।

मंत्रीजी खा गए गच्चा,सरकार छोड,आए कोर्ट के पक्ष में

युवा नेता को मंत्री बने हुए हैं 92 दिन
पत्रकारों के सवालों पर सफाई से बच निकले
उच्चतम न्यायालय के एट्रोसिटी एक्ट पर आए ताजा फैसले को लेकर जहां केन्द्र सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है वहीं गुजरात सरकार के सामाजिक अधिकारिता मंत्री ईश्वर भाई परमार अदालत के फैसले को सही ठहरा रहे हैं। परमार का कहना है कि अदालत के फैसले से पुराने कानून पर कोई असर नहीं पडेगा, पुलिस पहले भी गिरफ्तारी को लेकर सीआरपीसी के तहत निर्णय करती थी।
एट्रोसिटी को लेकर मंगलवार को दलित समुदाय के भारत बंद की घटना के बाद केन्द्र सरकार ने जहां अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए एट्रोसिटी एक्ट पर दिए ताजा फैसले को बदलने की मांग की है वहीं भाजपा शासित गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ईश्वर भाई परमार ने पत्रकारों को बताया कि भाजपा दलित समुदाय को लेकर संवेदनशील है, प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र मोदी ने संसद में तीन दिन तक केवल दलितों के एट्रोसिटी एक्ट पर ही चर्चा कराई जबकि एक्ट को 1989 में बनाने के बाद कांग्रेस ने कभी इसे याद नहीं किया।
परमार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद भी कांग्रेस देशभर में दलित समाज को गुमराह करने लगी लेकिन अदालत के समक्ष कोई याचिका दाखिल नहीं की। उनका यह भी दावा है कि अदालत के फैसले से एक्ट पर कोई प्रभाव नहीं पडा है, पुलिस ऐसे मामलों में पहले भी सीआरपीसी के तहत कार्यवाही करती थी, शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करना या नहीं करना पुलिस के विवेक पर निर्भर होता था, कानून में ऐसा कहीं नहीं लिखा गया है कि शिकायत दर्ज होते ही गिरफ्तारी की जाए। परमार ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी निर्दोष को दंडित नहीं किया जा सकता था उसकी स्वतंत्रता की रक्षा हर हाल में करनी चाहिए