Assocham demands to defer gst rollout

 आजाद भारत का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार कहे जा रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने में सिर्फ 2 हफ्ते का ही समय बचा है। ऐसे में उद्योग संगठन ने इसे फिलहाल टालने की मांग की है। एसोचैम का कहना है कि नई कर प्रणाली के लिए अभी होमवर्क पूरा नहीं हुआ है। आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल की 17वीं बैठक 18 जून को होनी है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करना चाहती है।

एसोचैम ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र:

एसोचैम ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जीएसटी के क्रियान्वयन को टालने का अनुरोध किया है। अपने पत्र में एसोचैम ने लिखा है कि आईटी नेटवर्क के तैयार न होने की वजह से करदाताओं को जीएसटी से जुड़ने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उद्योग संगठन के मुताबिक देश में मौजूदा कर व्यवस्था से जुड़े बहुत से लोग अभी तक आईटी टूल्स और पंजीकरण प्रक्रिया से अनजान होने की वजह से जीएसटी नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। इसके अलावा उद्योग संगठन ने कहा है कि पंजीकरण प्रक्रिया के पहले चरण में करदाताओं के जीएसटी नेटवर्क से जुड़ने के दौरान सिस्टम-सर्वर लगातार मरम्मत से गुजरता रहा।

एसोचैम के सेक्रटरी जनरल डी.एस. रावत ने कहा, “इससे कई बड़े सवाल खड़े होते हैं, जैसे कि क्या आईटी ढांचे को सही तरीके से जांचा गया था? इसके अलावा यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सिस्टम आगामी समय में सुचारू रूप से काम कर पाएगा?”

देश में कितने फीसद व्यापारी वैट से जुड़े:

बता दें कि देश में 80 लाख लोग उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट का भुगतान करते हैं। इसमें से 64.35 लाख लोग ही अब तक जीएसटी नेटवर्क से जुड़ पाए हैं। आपको बता दें कि जीएसटी नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया का दूसरा चरण बीते 1 जून से शुरू होकर और 15 जून को बंद हुआ है। वहीं इससे पहले बीते मंगलवार को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि जीएसटी 1 जुलाई से ही लागू होगा और इसकी तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं।

28 फीसद के स्लैब में रखे गए उत्पादों पर फिर विचार करें:

जीएसटी परिषद की बैठक से एक दिन पहले व्यापारियों के संगठन सीएआइटी ने 28 फीसद के स्लैब में रखे गए आइटमों पर फिर से विचार करने की मांग की है। उसका कहना है कि शीर्ष टैक्स ब्रैकेट में केवल लक्जरी और डिमेरिट गुड्स को ही रखा जाए। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल रविवार को लॉटरी पर टैक्स रेट तय करेगी। साथ ही ई-वे बिल से संबंधित नियमों और मुनाफाखोरी विरोधी उपायों को अंतिम रूप देगी।

जीएसटी से आम आदमी पर नहीं बढ़ेगा बोझ:

आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री वाई. रामकृष्णनुडु ने कहा है कि जीएसटी से आम आदमी पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। अलबत्ता लंबे समय में इस व्यवस्था से केंद्र और राज्यों को राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी। कई देशों ने जीएसटी को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह भारत में भी सफल होगी। इस चीज का खास तौर से ध्यान रखा गया है कि नई कराधान व्यवस्था से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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