corporate loby making profit due to water crisis

भारत में भूगर्भ जल का दोहन खतरनाक स्‍तर तक पहुंच गया है, जल के उपभोग करने की क्षमता से 72 फीसदी अधिक उपभोग हो रहा है तथा 54 फीसदी इलाके का पानी उपभोग के लायक नहीं है। जल संग्रह तथा वितरण की बडी योजनाएं लोगों के बजाए कॉरपोरेट व ठेकेदारों को अधिक लाभ पहुंचा रही हैं। जलपुरुष प्रो राजेंद्र सिंह का कहना है कि नदियों को जोडना पानी के निजीकरण जैसा है
अहमदाबाद में भूगर्भ जन प्रबंधन पर आयोजित परिसंवाद में प्रो सिंह ने बताया कि भूगर्भ जल के पुनर्भरण के लिए गांव गांव में व्यवस्था होना आवश्यक है अन्यथा देश को जलसंकट व जलप्रलय दोनों का सामना करना पड सकता है, देश की 99,8 प्रतिशत नदियां भूगर्भीय जल से संचालित हैं जबकि ,2 प्रतिशत ग्लेशियर व वर्षा से बहती हैं,  हाल देश में तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश में जलसंकट के हालात हैं, उनका कहना है कि महाराष्ट्र में सबसे पहले पेयजल व सिंचाई के लिए बडी बडी योजनाएं बनी लेकिन आज सबसे अधिक इसी राज्य में किसान आत्महत्या हो रही हैं? गुजरात की नदियो को सबसे अधिक प्रदूषित बताते हुए सिंह ने यहां स्थानीय स्तर पर जल प्रबंधन पर बल दिया, उनका कहना है कि पानी के परिवहन के बजाए स्थानीय स्रोत को ही पुनर्जीवित किया जाना चाहिए?
नदी जोडो अभियान को उन्होंने दुनिया की सात बडी कंपनियों के लिए फायदे का सौदा बताया लेकिन इससे  देश को ग्लोबल वार्मिंग व क्लाईमेट चेंज का खतरा बताया? जल प्रबंधन के क्रत्रिम तरीके अपनाने पर महाराष्ट्र, पंजाब, उडीसा में बिगडे हालात का उदाहरण देते हुए सिंह ने कहा कि देश में वर्षा की कमी नहीं है, अकेले सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती चूंकि वोट बैंक के दबाव में वह जनता पर किसी कार्य का दबाव नहीं डाल सकती इसलिए समाज को जागरुक होना चाहिए? उन्होंने जल प्रबंधन के लिए इजरायल, जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन आदि देशों की प्रशंसा करते हुए भारत को जल संरक्षण, भूगर्भ जल पुनर्भरण के लिए पारंपरिक तरीके अपनाने पर बल दिया? सिंह ने बोतल बंद पानी को भी हेल्थ व वेल्थ  के लिए हानिकारक बताते हुए कहा कि 15 साल में यह 500 से 50,000 करोड का व्यापार बन गया?
प्रताप युनिवर्सिटी के पूर्व प्रो आर सी पुरोहित ने बताया कि वर्षा जल अम्रत है, इस जल का हमें घरों में टांके व होज बनाकर संग्रह करना चाहिए? इसके बजाए हम इसको नालों में बहने दे रहे हैं? उनका यह   भी कहना है कि आरओ व बोतलबंद पानी से मिनरल तत्व निकल जाते हैं इसलिए ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?  जिससे शरीर में बी12 की कमी हो जाती है? डवलपमेंट सपोर्ट सेंटर के कार्यकारी निदेशक मोहन शर्मा ने बताया कि जलसंकट से निपटने के लिए भूमिगत जल व वर्षा जल का प्रबंधन नहीं किया गया तो आने वाले समय में कई गांव शहरों को पानी के लिए तरसना पड सकता है? डीएससी गुजरात के मेहसाणा, साबरकांठा, अरावली के 24 गांव में राजस्थान के बारां में 24 गांव तथा मध्य प्रदेश इंदौर देवास के 35 गांव में जल प्रबंधन का कार्य कर रही है?
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