झारखंड के मंत्री सीख रहे प्रबंधन के फंडे

 

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100 Years of Sabarmati Ashram

तो इसीलिए यह भूमि है तपोस्थली
इतिहासकारों का मत है महर्षि दधीचि ऋषि का आश्रम भी यही पर था

साबरमती आश्रम अहमदाबाद की स्थापना को सौ साल पुरे हो गए हैं। महात्मा गांधी ने 1917 में इस आश्रम की स्थापना की थी, 1963 में तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरु ने यहां राष्ट्रीय संग्रहालय का उदघाटन किया था। दुनिया के तमाम वीवीआईपी, राष्ट्राध्यक्ष, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व सामाजिक, आर्थिक, सांस्क्रतिक, तकनीकी जगत के दिग्गज व महिला पुरुष यहांआकर घन्य महसूस करते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को गांधी आश्रम से अपनी दो दिवसीय गुजरात यात्रा की शुरूआत करेंगे।
 
भारत के गुजरात राज्य अहमदाबाद जिले के प्रशासनिक केंद्र अहमदाबाद के समीप साबरमती नदी के किनारे स्थित है। सत्याग्रह आश्रम की स्थापना सन् 1917 में अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में महात्मा गांधी द्वारा हुई थी। सन् 1917 में यह आश्रम साबरमती नदी के किनारे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित हुआ और तब से साबरमती आश्रम कहलाने लगा। आश्रम के वर्तमान स्थान के संबंध में इतिहासकारों का मत है कि पौराणिक दधीचि ऋषि का आश्रम भी यही पर था। आश्रम वृक्षों की शीतल छाया में स्थित है। यहाँ की सादगी एवं शांति देखकर आश्चर्यचकित रह जाना पड़ता है। आश्रम की एक ओर सेंट्रल जेल और दूसरी ओर दुधेश्वर श्मशान है।
आश्रम से प्रारंभ में निवास के लिये कैनवास के खेमे और टीन से छाया हुआ रसोईघर था। सन् 1917 के अंत में यहाँ के निवासियों की कुल संख्या 40 थी। आश्रम का जीवन गांधी जी के सत्य, अहिंसा आत्मससंयम, विराग एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित महान प्रयोग था और यह जीवन उस सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्रांति का, जो महात्मा जी के मस्तिष्क में थी, प्रतीक था।
 
साबरमती आश्रम सामुदायिक जीवन को, जो भारतीय जनता के जीवन से सादृय रखता है, विकसित करने की प्रयोगाशाला कहा जा सकता था। इस आश्रम में विभिन्न धर्मावलबियों में एकता स्थापित करने, चर्खा, खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा जनता की आर्थिक स्थिति सुधारने और अहिंसात्मक असहयोग या सत्याग्रह के द्वारा जनता में स्वतंत्रता की भावना जाग्रत करने के प्रयोग किए गए। आश्रम भारतीय जनता एवं भारतीय नेताओं के लिए प्रेरणाश्रोत तथा भारत के स्वतंत्रता संघर्ष से संबंधित कार्यों का केंद्रबिंदु रहा है। कताई एवं बुनाई के साथ-साथ चर्खे के भागों का निर्माण कार्य भी धीरे-धीरे इस आश्रम में होने लगा।
 
आश्रम में रहते हुए ही गांधी जी ने अहमदाबाद की मिलों में हुई हड़ताल का सफल संचालन किया। मिल मालिक एवं कर्मचारियों के विवाद को सुलझाने के लिए गांधी जी ने अनान आरंभ कर दिया था, जिसके प्रभाव से 21 दिनों से चल रही हड़ताल तीन दिनों के अनान से ही समाप्त हो गई। इस सफलता के पचात् गांधी जी ने आश्रम में रहते हुए खेड़ा सत्याग्रह का सूत्रपात किया। रालेट समिति की सिफारिाों का विरोध करने के लिए गांधी जी ने यहाँ तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं का एक सम्मेलन आयोजित किया और सभी उपस्थित लोगों ने सत्याग्रह के प्रतिज्ञा पत्र हर हस्ताक्षर किए।
 
साबरमती आश्रम में रहते हुए महात्मा गांधी ने 2 मार्च 1930 ई. को भारत के वाइसराय को एक पत्र लिखकर सूचित किया कि वह नौ दिनों का सविनय अवज्ञा आंदोलन आरंभ करने जा रहे हैं। 12 मार्च 1930 ई. को महात्मा गांधी ने आश्रम के अन्य 78 व्यक्तियों के साथ नमक कानून भंग करने के लिए ऐतिहासिक दंडी यात्रा की। इसके बाद गांधी जी भारत के स्वतंत्र होने तक यहाँ लौटकर नहीं आए।
गांधी जी की मृत्यु के पचात् उनकी स्मृति को निरंतर सुरक्षित रखने के उद्देय से एक राष्ट्रीय स्मारक की स्थापना की गई। साबरमती आश्रम गांधी जी के नेतृत्व के आरंभ काल से ही संबंधित है, अत: गांधी-स्मारक-निधि नामक संगठन ने यह निर्णय किया कि आश्रम के उन भवनों को, जो गांधी जी से संबंधित थे, सुरक्षित रखा जाए। इसलिए 1951 ई. में साबरमती आश्रम सुरक्षा एवं स्मृति न्यास अस्तित्व में आया। उसी समय से यह न्यास महात्मा गांधी के निवास, हृदयकुंज, उपासनाभूमि नामक प्रार्थनास्थल और मगन निवास की सुरक्षा के लिए कार्य कर रहा है।
 
हृदयकुंज में गांधी जी एवं कस्तूरबा ने लगभग 12 वर्षों तक निवास किया था। 10 मई 1963 ई. को श्री जवाहरलाल ने हृदयकुंज के समीप गांधी स्मृति संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस संग्रहालय में गांधी जी के पत्र, फोटोग्राफ और अन्य दस्तावेज रखे गए हैं। यंग इंडिया, नवजीवन तथा हरिजन में प्रकाशित गांधी जी के 400 लेखों की मूल प्रतियाँ, बचपन से लेकर मृत्यु तक के फोटोग्राफों का बृहत् संग्रह और भारत तथा विदेशों में भ्रमण के समय दिए गए भाषणों के 100 संग्रह यहाँ प्रदर्शित किए गए हैं। संग्रहालय में पुस्तकालय भी हैं, जिसमें साबरमती आश्रम की 4,000 तथा महादेव देसाई की 3,000 पुस्तकों का संग्रह है। इस संग्रहालय में महात्मा गांधी द्वारा और उनको लिखे गए 30,000 पत्रों की अनुक्रमणिका है। इन पत्रों में कुछ तो मूल रूप में ही हैं और कुछ के माइक्रोफिल्म सुरक्षित रखे गए हैं।
 
जब तक साबरमती आश्रम का दर्शन न किया जाए तब तक गुजरात या अहमदाबाद नगर की यात्रा अपूर्ण ही रहती है। अब तक विश्व के अनेक देशों के प्रधानों, राजनीतिज्ञों एवं विशिष्ट व्यक्तियों ने इस आश्रम के दर्शन किए हैं।
बापू जी ने आश्रम में 1915 से 1933 तक निवास किया। जब वे साबरमती में होते थे, तो एक छोटी सी कुटिया में रहते थे जिसे आज भी “ह्रदय-कुञ्ज” कहा जाता है। यह ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य निधि है जहाँ उनका डेस्क, खादी का कुर्ता, उनके पत्र आदि मौजूद हैं। “ह्रदय-कुञ्ज” के दाईं ओर “नन्दिनी” है। यह इस समय “अतिथि-कक्ष” है जहाँ देश और विदेश से आए हुर अतिथि ठहराए जाते थे। वहीं “विनोबा कुटीर” है जहाँ आचार्य विनोबा भावे ठहरे थे।
 
यहाँ विभिन्न गतिविधियों के लिए कई कुटीर बनाए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
हृदय कुंज
हृदय कुंज नामक कुटीर आश्रम के बीचो बीच स्थित है, इसका नामकरण काका साहब कालेकर ने किया था। 1919 से 1930 तक का समय गांधी जी ने यहीं बिताया था और उन्होंने यहीं से ऐतिहासिक दांडी यात्रा की शुरुआत की थी।
 
विनोबा-मीरा कुटीर
इसी आश्रम के एक हिस्से में विनोबा-मीरा कुटीर स्थित है। यह वही जगह है, जहाँ 1918 से 1921 के दौरान आचार्य विनोबा भावे ने अपने जीवन के कुछ महीने बिताए थे। इसके अलावा गांधी जी के आदर्शो से प्रभावित ब्रिटिश युवती मेडलीन स्लेड भी 1925 से 1933 तक यहीं रहीं। गांधी जी ने अपनी इस प्रिय शिष्या का नाम मीरा रखा था। इन्हीं दोनों शख्सीयतों के नाम पर इस कुटीर का नामकरण हुआ।
 
प्रार्थना भूमि
आश्रम में रहने वाले सभी सदस्य प्रतिदिन सुबह-शाम प्रार्थना भूमि में एकत्र होकर प्रार्थना करते थे। यह प्रार्थना भूमि गांधी जी द्वारा लिए गए कई ऐतिहासिक निर्णयों की साक्षी रह चुकी है।
 
नंदिनी अतिथिगृह
आश्रम के एक मुख्यद्वार से थोडी दूरी पर स्थित है-गेस्ट हाउस नंदिनी। यहाँ देश के कई जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी जैसे- पं॰ जवाहरलाल नेहरू, डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद, सी.राजगोपालाचारी, दीनबंधु एंड्रयूज और रवींद्रनाथ टैगोर आदि जब भी अहमदाबाद आते थे तो यहीं ठहरते थे।
 
उद्योग मंदिर
गांधी जी ने हस्तनिर्मित खादी के माध्यम से देश को आजादी दिलाने का संकल्प लिया था। उन्होंने मानवीय श्रम को आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का प्रतीक बनाया। यही वह जगह थी, जहां गांधी जी ने अपने आर्थिक सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप दिया। यहीं से चरखे द्वारा सूत कातकर खादी के वस्त्र बनाने की शुरुआत की गई।

Assocham demands to defer gst rollout

 आजाद भारत का सबसे बड़ा अप्रत्यक्ष कर सुधार कहे जा रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने में सिर्फ 2 हफ्ते का ही समय बचा है। ऐसे में उद्योग संगठन ने इसे फिलहाल टालने की मांग की है। एसोचैम का कहना है कि नई कर प्रणाली के लिए अभी होमवर्क पूरा नहीं हुआ है। आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल की 17वीं बैठक 18 जून को होनी है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करना चाहती है।

एसोचैम ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र:

एसोचैम ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जीएसटी के क्रियान्वयन को टालने का अनुरोध किया है। अपने पत्र में एसोचैम ने लिखा है कि आईटी नेटवर्क के तैयार न होने की वजह से करदाताओं को जीएसटी से जुड़ने में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उद्योग संगठन के मुताबिक देश में मौजूदा कर व्यवस्था से जुड़े बहुत से लोग अभी तक आईटी टूल्स और पंजीकरण प्रक्रिया से अनजान होने की वजह से जीएसटी नेटवर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। इसके अलावा उद्योग संगठन ने कहा है कि पंजीकरण प्रक्रिया के पहले चरण में करदाताओं के जीएसटी नेटवर्क से जुड़ने के दौरान सिस्टम-सर्वर लगातार मरम्मत से गुजरता रहा।

एसोचैम के सेक्रटरी जनरल डी.एस. रावत ने कहा, “इससे कई बड़े सवाल खड़े होते हैं, जैसे कि क्या आईटी ढांचे को सही तरीके से जांचा गया था? इसके अलावा यह सवाल भी उठता है कि क्या यह सिस्टम आगामी समय में सुचारू रूप से काम कर पाएगा?”

देश में कितने फीसद व्यापारी वैट से जुड़े:

बता दें कि देश में 80 लाख लोग उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट का भुगतान करते हैं। इसमें से 64.35 लाख लोग ही अब तक जीएसटी नेटवर्क से जुड़ पाए हैं। आपको बता दें कि जीएसटी नेटवर्क से जुड़ने की प्रक्रिया का दूसरा चरण बीते 1 जून से शुरू होकर और 15 जून को बंद हुआ है। वहीं इससे पहले बीते मंगलवार को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि जीएसटी 1 जुलाई से ही लागू होगा और इसकी तैयारियों जोर-शोर से चल रही हैं।

28 फीसद के स्लैब में रखे गए उत्पादों पर फिर विचार करें:

जीएसटी परिषद की बैठक से एक दिन पहले व्यापारियों के संगठन सीएआइटी ने 28 फीसद के स्लैब में रखे गए आइटमों पर फिर से विचार करने की मांग की है। उसका कहना है कि शीर्ष टैक्स ब्रैकेट में केवल लक्जरी और डिमेरिट गुड्स को ही रखा जाए। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली जीएसटी काउंसिल रविवार को लॉटरी पर टैक्स रेट तय करेगी। साथ ही ई-वे बिल से संबंधित नियमों और मुनाफाखोरी विरोधी उपायों को अंतिम रूप देगी।

जीएसटी से आम आदमी पर नहीं बढ़ेगा बोझ:

आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री वाई. रामकृष्णनुडु ने कहा है कि जीएसटी से आम आदमी पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। अलबत्ता लंबे समय में इस व्यवस्था से केंद्र और राज्यों को राजस्व को बढ़ाने में मदद मिलेगी। कई देशों ने जीएसटी को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह भारत में भी सफल होगी। इस चीज का खास तौर से ध्यान रखा गया है कि नई कराधान व्यवस्था से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

pakistani how can digest Muhajir

एक मुहाजिर का कप्तान बनना कुछ पाकिस्तानी पचा नहीं पा रहे’
चैंपियंस ट्रॉफ़ी में रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे मैच का रोमांच अपने चरम पर है और दोनों ही देशों के लोग अपनी-अपनी टीमों की जीत की दुआ कर रहे हैं.
लेकिन पाकिस्तानी टीम के कप्तान सरफ़राज़ के कुछ रिश्तेदार भारत की जीत की दुआ कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के इटावा में रह रहे सरफ़राज़ अहमद के मामू महबूब हसन कहते हैं कि उनकी दुआएं सरफ़राज के साथ ज़रूर हैं लेकिन जीत वो अपने देश की ही देखना चाहते हैं. मूल रूप से प्रतापगढ़ ज़िले में कुंडा के रहने वाले महबूब हसन इटावा कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज में हेड क्लर्क के पद पर काम करते हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की जीत इसलिए भी सुनिश्चित-सी लग रही है क्योंकि इस समय टीम बेहद संतुलित है और सभी खिलाड़ी बहुत अच्छा खेल रहे हैं.

amir khan 3rd marriage to dangal girl

मैं भी आमिर के हाथ-पैर बांधे रखूंगा ताकि
वो तीसरी शादी न कर सकें ..??सलमान
कुछ दिनों पहले आमिर ने कहा था कि सलमान खान के हाथ-पैर बांधकर उनकी शादी कराएंगे. ‘ट्यूबलाइट’ के प्रमोशन के दौरान मीडिया ने जब सलमान से इस पर उनकी प्रतिक्रिया लेनी चाही तो सलमान का जवाब था- हां मैं भी उनके हाथ-पैर बांधे रखूंगा ताकि वो तीसरी शादी न कर सकें. दरअसल ये आमिर के ऊपर तंज था, क्योंकि आजकल आमिर और दंगल गर्ल फातिमा सना शेख की बीच नजदीकियों की खबरें आ रही हैं. बॉलीवुड में 52 साल के आमिर और 25 साल की फातिमा के अफेयर के चर्चे हो रहे हैं. खबर तो यहां तक है कि आमिर और सना की नजदीकियों से आमिर की पत्नी किरण राव भी खफा हैं.
‘दंगल’ में सना के पिता का रोल करने वाले आमिर इन दिनों माल्टा में अपनी फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ की शूटिंग कर रहे हैं.
आपको बता दें कि आमिर ने पहली शादी 1986 में रीना दत्त से की फिर आमिर की जिंदगी में किरण राव की एंट्री हुई और दो बच्चों के पिता आमिर ने रीना से तलाक लेकर 2005 में किरण राव से शादी कर ली. अब देखना यह है कि सलमान के इस तंज का आमिर क्या जवाब देते हैं.

विरोध का गिरता स्तर, गोवध

किसी भी राज्य या फिर राष्ट्र की उन्नति अथवा अवनति में राजनीति की एक अहम भूमिका होती है।
मजबूत विपक्ष एवं सकारात्मक विरोध की राजनीति  विकास के लिए आवश्यक भी हैं लेकिन केवल विरोध करने के लिए विरोध एवं नफरत की राजनीति जो हमारे देश में आज कुछ लोग कर रहे हैं काश वो एक पल रुक कर सोच तो लेते कि इससे न तो देश का भला होगा और न ही स्वयं उनका।
मोदी ने जिस प्रकार देश की नब्ज अपने हाथ में पकड़ ली है उससे हताश विपक्ष आज एक दूसरे के हाथ पकड़ कर सब मिलकर भी अति उतावलेपन में केवल स्वयं अपना ही नुकसान कर रहे हैं। अपने ही  तरकश से निकलने वाले तीरों से खुद को ही घायल कर रहे हैं।
जिस निर्लज्जता के साथ यूथ काँग्रेस के कार्यकर्ताओं ने केरल के कुन्नूर में बीच सड़क में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एक बछड़े का वध करते हुए अपना वीडियो डाला है तो खून के इन छीटों को काँग्रेस कभी अपने दामन से हटा नहीं पाएगी क्योंकि यह काम किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया बल्कि इस घटना को अंजाम दिया है काँग्रेस के झंडे तले उस यूथ काँग्रेस के पदाधिकारी ने जिस यूथ काँग्रेस का नेतृत्व कुछ सालों पहले स्वयं राहुल गांधी ने किया था।
सम्पूर्ण विश्व में अहिंसा के पुजारी के रूप में पूजे जाने वाले जिस गाँधी के नाम के सहारे काँग्रेस आज तक जीवित है वही पार्टी जब आज अपने विरोध प्रदर्शन के लिए हिंसा का सहारा ले रही है तो समय आ गया है कि भारत नाम के इस देश के नागरिक होने के नाते हम सभी सोचें कि हमारा देश कहाँ जा रहा है और ये राजनैतिक पार्टियाँ इस देश की राजनीति को किस दिशा में ले जा रही हैं।
सत्ता की राजनीति आज नफरत की राजनीति में बदल चुकी है और सभी प्रकार की सीमाएं समाप्त होती जा रही हैं।
गाय के नाम पर राजनीति करने वाले शायद यह  भूल रहे हैं कि गाय को माता मान कर पूजना इस देश की सभ्यता और संस्कृति में शामिल है यह हमारे देश के संस्कार हैं आधारशिला है वोट बैंक नहीं।
लेकिन दुर्भाग्यवश आज हमारे देश की राजनैतिक पार्टियों की नजर में इस देश का हर नागरिक अपनी जाति सम्प्रदाय अथवा लिंग के आधार पर उनके लिए वोट बैंक से अधिक और कुछ भी नहीं है।
राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए हम गोहत्या करने से भी परहेज़ नहीं करते  गोहत्या के नाम पर एक दूसरे की हत्या भी हमें स्वीकार है और हम मानव सभ्यता के विकास के चरम पर हैं?
हम सभी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और हम जीने के लिए न सिर्फ दूसरे पर लेकिन प्रकृति पर भी निर्भर हैं तो एक दूसरे अथवा ईश्वर द्वारा बनाए गए अन्य जीवों एवं प्रकृति के प्रति इतने असंवेदनशील कैसे हो सकते हैं। वो भी उस गाय के प्रति जिसे हमारी संस्कृति में माँ कहा गया है?
क्या ये असंवेदनशील लोग इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं कि क्यों सम्पूर्ण दुधारु पशुओं में से केवल गाय के ही दूध को वैज्ञानिक अनुसंधानों के बाद माँ के दूध के तुल्य माना गया?
क्यों अन्य पशुओं जैसे भैंस बकरी ऊँटनी के दूध में मातृत्व के पूरक अंश नहीं पाए जाते?
क्या गाय के अलावा किसी अन्य जीव के मल मूत्र में औषधीय गुण पाए जाते हैं?
जब ईश्वर ने स्वयं गाय का सृजन मनुष्य का पालन करने योग्य गुणों के साथ किया है और आधुनिक विज्ञान भी इन तथ्यों को स्वीकार कर चुका है तो फिर वह गाय जो जीते जी उसे  पोषित करती है तो क्यों हम उसे माँ का दर्जा नहीं दे पा रहे ? राजिस्थान हाई कोर्ट की सलाहानुसार अपने पड़ोसी देश नेपाल की तरह क्यों नहीं हम भी गाय को अपना राष्ट्रीय पशु घोषित कर देते  उसे  मारकर उसके ही माँस से पोषण प्राप्त करने की मांग कहाँ तक उचित है? भारत में लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बीफ की परिभाषा में से गोमांस को हटा दिया जाए तो  मांसाहार का सेवन करने वाले लोगों को भी कोई तकलीफ नहीं होगी और भारतीय जनमानस की भावनाओं को भी सम्मान मिल जाएगा।
हमारे पास गाय के दूध गोबर और मूत्र के कोई विकल्प नहीं है लेकिन माँस के तो अन्य भी कई विकल्प हैं तो फिर ये कैसी राजनीति है जिसमें गोमांस से ही कुछ लोगों की भूख मिटती है? शायद यह भूख पेट की नहीं सत्ता की है ताकत की है नफरत की है साजिश की है।
नहीं तो जिस देश के लोग पेड़ पौधे ही नहीं पत्थर की भी पूजा करते हैं जिस देश में सभी के मंगल की कामना करते हुए कहा जाता हो
” सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् तु भाग्भवेत् ”
उसी देश में कुछ लोग विरोध करने के लिए इस स्तर तक गिर रहे हैं और जिस प्रकार कुतर्कों का सहारा ले रहे हैं , यही कहा जा सकता है कि  ” विनाश काले विपरीत बुद्धि ” क्योंकि खून अकेले उस बछड़े का नहीं बहा खून उस पार्टी का भी बह गया जिसके झण्डे के नीचे यह कृत्य हुआ एवं अन्त केवल उस बछड़े का नहीं हुआ बल्कि उस पार्टी के भविष्य का भी हुआ कमजोर अकेले वो पार्टी नहीं हुई समूचा विपक्ष हो गया और बछड़े के प्राण आगे आने वाले विधानसभा चुनावों में  भाजपा में एक बार फिर से  नए प्राण फूंक गए।
-** डॉ नीलम महेंद्र [ मौलिक लेख ]

Bjp target congres winning seat in gujarat

कांग्रेस को उसके गढ में मात की तैयारी

रुपाणी भी निकालेंगे आदिवासी यात्रा

अहमदाबाद। मध्‍य गुजरात में आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ऐडी चोटी का जोर लगा रही है। प्रदेश अध्‍यक्ष की आदिवासी यात्रा के बाद पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह आदिवासी परिवार के यहां लंच कर चुके हैं, अब सीएम रुपाणी नर्मदा यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।

गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा व कांग्रेस सामाजि‍क व जातिगत समीकरण साधने में जुटी है। कांग्रेस उपाध्‍यक्ष्‍ा राहुल गांधी ने नर्मदा जिले के देडियापाडा से चुनावी शंखनाद किया था अब मुख्‍यमंत्री विजय रुपाणी वहीं से आदिवासी यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। नर्मदा सेवा यात्रा व गंगा शुद्किरण की तर्ज पर रुपाणी इस यात्रा की रुपरेखा तैयार कर रहे हैं। मध्‍य गुजरात की करीब 40 सीट में से दो दर्जन सीट आदिवासी बहुल हैं जिनमें से 16 पर कांग्रेस का कब्‍जा है। आदिवासी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक रहा है, अब भाजपा अपने नए सामाजिक समीकरण को साधने के लिए आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने में जुट गई है।

भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने गत दिनों पंचमहाल के देवलिया गांव में भाजपा की विसतारक योजना का आरंभ कि तथा बाद में एक आदिवासी परिवार के यहां गुजरात प्रभारी डॉ भूपेंद्र यादव तथा अध्‍यक्ष जीतू वाघाणी, महासचिव भरतसिंह परमार के साथ भोजन किया था। वाघाणी इस इलाके में आदिवासी यात्रा निकाल चुके हैं तथा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी गुजरात स्‍थापना दिवस पर नर्मदा जिले के देडयिापाडा में महारैली को संबोधित किया था अब मुख्‍यमंत्री रुपाणी नर्मदा यात्रा निकालकर आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के प्रयास में हैं। रुपाणी मध्‍यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान की नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान अमरकंटक में शामिल हुए थे, उसी तर्ज पर अब वे गुजरात में यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।

इन सीटों पर है भाजपा की नजर

बोरसद, अंकलाव, पेटलाद, सोजित्रा, कपडवंज, बालासिनोर, लूनावाडा, गोधरा, दाहोद, छोटो उदेपुर, संखेडा,झालोद, गरबाडा, संतरामपुरा, महुआ आदि।